daraar.

मुक्त छंद

आब ए तकलीफ़ तो हैमगर लफ़्ज़ों में साज़ नहीं लिख तो रहा हूँमगर ख़यालों में वो बात नहीं खो बैठा हूँ हुनरजज़्बातों को शब्दों में पिरोने का

ये कैसा आलम है दरारकहीं ये कोई मज़ाक़ तो नहीं

~दरार