daraar.

मुक्त छंद2026

अब चलो, चूँकि मेरी साँस ख़त्म होने को हैतुम भी, अपने दिल की बात रख सकती हो जो भी, बचा हुआ है मुझमेंअपने अल्फ़ाज़ से, आज ये क़िस्सा भी ख़त्म कर सकती हो लेकिन, कभी मेरी आँखों मेंअगर तुम्हारी तिश्नगी की बूँदें दिखाई दी हों तुम्हेंतो इस सुपुर्द-ए-ख़ाक शरीर में,तुम जान, भर सकती हो

अब हालत ये है,के मेरा होना न होनातुम्हारी मर्ज़ी का मुंतज़िर है तुम चाहो, तो मुझे आबाद कर सकती होया तुम चाहो, तो मुझे बर्बाद कर सकती हो

~दरार