daraar.

कविता2026

झूठा हूँ मैं?

मैं सबको सब कुछझूठ बतलाता हूँहूँ कुछ औरकुछ और नज़र आता हूँ

माथे की सिलवटेंसुलझा के रखता हूँअंदर चाहे लाख हों तूफ़ानमगर मौन नज़र आता हूँ होंठों की लकीरों कोसमेट के रखता हूँहूँ एक रोगी मगरयोगी नज़र आता हूँ

~दरार