daraar.

मुक्त छंद2026

क्या ज़रूरी है हर इश्क़ का मुकम्मल हो जानाहर बार मोहब्बत के फूल बरसानाअसल ज़िंदगी में काँटे भी नसीब होते हैंलाज़मी है किसी मरहम का ज़हर हो जाना

~दरार