शायद वो विष का प्याला भी मेरे हक़ में नहींवो मेरी जान का रखवाला भी मेरे हक़ में नहींदिल कराह रहा है दर्द ए हिज्र में मगरवो मोजिज़ा जो पसंद है मुझे, मेरे हक़ में नहीं
~दरार
शायद वो विष का प्याला भी मेरे हक़ में नहींवो मेरी जान का रखवाला भी मेरे हक़ में नहींदिल कराह रहा है दर्द ए हिज्र में मगरवो मोजिज़ा जो पसंद है मुझे, मेरे हक़ में नहीं
~दरार