daraar.

शेर

हर चेहरे पर रखी एक नक़ली मुस्कान हैथोड़ी देर बैठे तो पता लगा, हर खेत शमशान हैखिल-खिला रहे थे वो सरसों के फूलों की तरहहम ने रुक के देखा तो पाया जड़ें वीरान हैं

~दरार