daraar
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Lekhan
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कविताएँ और शायरी
Kavitaayein aur shaayari
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शेर
2026
शायद कोई कमी रह गई थी मेरे हुनर में
वरना क्यों ही बदली होती ये शाम हिज्र में
~दरार
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