वो दरिया आँखों से ओझल हो चला थाजो बनके हम-राही, कुछ देर साथ चला थाबस इस सबब-ए-ऐतबार से माँझी मुंतज़िर बना बैठा हैऐतबार भी ऐसा कि बिन पतवार नौका ले चला था
~दरार
वो दरिया आँखों से ओझल हो चला थाजो बनके हम-राही, कुछ देर साथ चला थाबस इस सबब-ए-ऐतबार से माँझी मुंतज़िर बना बैठा हैऐतबार भी ऐसा कि बिन पतवार नौका ले चला था
~दरार