ज़रूरी नहीं हर क़िस्से को अंजाम मिलेइस दिल को, कभी आराम मिलेशामें फिर से शब-ए-बहार होंकिसी अनजान शख़्स से फिर इक़रार हो
~दरार
ज़रूरी नहीं हर क़िस्से को अंजाम मिलेइस दिल को, कभी आराम मिलेशामें फिर से शब-ए-बहार होंकिसी अनजान शख़्स से फिर इक़रार हो
~दरार