daraar.

नज़्म2026

आँसू

बड़ी मुश्किल सेतेरा भरोसा कर केआज घर से निकला हूँसज के, सँवर के

एक अरसे सेमुलाक़ात नसीब न हुईतुम्हें देखा तो सोचाकि चलो देखते हैंथोड़ी गुफ़्तगू करके आज रूबरू हुएतो पूरा मोहल्ला हैरान हैकैसे बताऊँकिसी ने लगा रखा थाताला दर पे