daraar.

कविता2026

मैं जब इन बादलों को देखता हूँदेख के सोचता हूँन जाने किन ख़यालों में खो जाता हूँ ऐसा लगता हैकि इनके और मेरे बीच की चंद साँसेंजो दूरी बनी हुई थीवो कुछ कम हो गई है

मैं जितना इन्हें देखता हूँउतना इनके जादू में खोता जाता हूँइस विशाल अंबर केविशाल बादलमानो कोई राज़ छुपाए हुए हैंआसमान काजिसकी आड़ मेंअंबर अपनी मस्तियाँ बिखेरता है