daraar.

कविता2026

एक सुबह होती है?

रोज़एक सुबह होती हैमगर जानेकिधर होती है

मैं खोलता हूँआँखों की सीपियाँ हर रोज़और ये समुंदर में भीगीतर-ओ-तार होती है चहचहा के बुलाता हैकोई तो मुझे गलियारे मेंपर शायदवो सिर्फ़पक्षियों की भूख होती है