daraar.

मुक्त छंद2026

मुझे लगता थाके देश बदलने सेकुछ ज़ख़्मकम हो जाते हैं मगर ये दिल हैजिसकोसरहदों कीलकीर नहीं मालूम

कोई ख़यालआख़िर कैसे हो क़ाबूजिसको समय कीतब्दीली नहीं मालूम ये तो यूँ हीतकता हैउस चाँद कोजिसको अपने सितारे नहीं मालूम

~दरार