daraar.

मुक्त छंद2026

ये हवाएँ ले गईं उन बादलों कोजिनके साए में मैंने अंकुरित होना चाहा रह गया ज़ेहन में बस एक ख़याल बाक़ीकिसने मुझे चाहा, किसे मैंने चाहा....

~दरार