ये शाम, बस आज, गुज़र जाएया ख़ुदा, हमें अज़ाब सहने का, हुनर आए जो बख़्शी है ज़माने भर पर अपनी रहमत तू नेकुछ ऐसा कर, कि वो मेरी गली से गुज़र जाए
~दरार
ये शाम, बस आज, गुज़र जाएया ख़ुदा, हमें अज़ाब सहने का, हुनर आए जो बख़्शी है ज़माने भर पर अपनी रहमत तू नेकुछ ऐसा कर, कि वो मेरी गली से गुज़र जाए
~दरार