daraar.

मुक्त छंद

तेरे बाद दिल लगाऊँ कैसेअपनी शामें किसी और संग बिताऊँ कैसेजो तू ने छोड़ दिया है मेरा क़िस्सा अधूराइस कहानी में नया किरदार लाऊँ कैसे फिर रहा हूँ दर ब दरज़माने में समेटे अपना ग़मतेरे जैसा मरहमलाऊँ कैसे

मुझे मालूम हैकि तुझे फ़र्क़ नहीं पड़तापर तेरे सिवा किसी और कोदिल में बसाऊँ कैसे

~दरार